सोमवार, दिसंबर 28

कर्म मेरा नेक्स्ट स्टॉप दिल्ली .. धर्म मेरा नेक्स्ट दिल्ली . आई लव माई नेक्स्ट स्टॉप दिल्ली..!


नोट- भले ही यह कहानी सच के करीब लगे, लेकिन यहां ये कहना लाजिमी है कि इसका किसी लड़की या घटना से सीधे-सीधे कोई लेना देना नहीं है। कहानी में आई घटना का किसी लड़की-विशेष की जिंदगी से मिलना महज एक संयोग हो सकता है!!!

बाकि सब सपने होते है... ।अपने तो अपने होते है ...!

ऐसा लगता है , जहां तुम हो वंहा मै हूं! इस शहर की मिट्टी की खुशबू ह़ी कुछ और है ! यंहा के लोगो का प्यार, यंहा की गलियां और तो और यंहा की इमारते भी बोलती है ! प्यार का क्या मतलब होता ! सिर्फ और सिर्फ ...? मै कोई बरेली के बाजार में .. बरेली के बाजार में..का जिक्र नहीं कर रहा हूं!

कोई उसे बोले इस बार मै सारी नाराजगी दूर कर दूंगा ! प्रेम यह तुम क्या कह रहे हो ! हाँ किरण - ऐसी छोटी -छोटी और कटी -कटी बात मत किया करो ! वह कोई गैर नहीं है ! जिसे तुम नफरत करती हो वही तुम्हारा कल अपना होगा ! और तुम तो जानती हो .... बाकि सब सपने होते है... .अपने तो अपने होते है ...!


प्रेम --सारी उम्र हम मर- मर के जी लिये एक पल तो हमें जीने दो !! क्यों बहाने बनाते हो !

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किरण जरा तस्बीर से तू निकल कर बाहर आ ! तुम्हे पता है उस दिन के बाद एक -एक दिन अनाथो की जिन्दगी जी रहा हू! यह उमीदे मत तोड़ो ! बोलो क्यों तुम सिर्फ तस्बीरो में बन कर रही गई हो ..! दिल से एक बार बोल दो ! तुम्हे पता है हम नए रिश्ते बनाने के लिये पुराने रिश्ते को तोड़ नहीं देते !आज पूरी दुनिया हमारे रिश्ते को जान गई है और पहचान गई है ! रिश्ता एक अटूट बिश्वास का ?

तुम्हे पता है दुनिया में जितने अच्छे लोग है आज वह एक प्यार की कड़ी में बंधे हैं! आज तुम्हारे रिश्ते प्रेम की जिन्दगी आवाद हो सकती है ! आज तुम्हारे ऒठो की खामोसी पर पूरी दुनिया की नजर है ! मानो कंही आग लगने से पहले उठता है ऐसा घुंआ. ! बोले तो - आदमी अकेला हो या या फिर मेला है .! फिर ... स्पीच मत दो //


हा प्रेम मै एक पागल लड़की हूं! क्या पता .. सब कुछ पा लिया हू ..पर कुछ नहीं पाई हू जैसा लगता है ! इतना होने के बौजूद डेल्ही में दिल नहीं लगता !


मुझे एक इन्सान का प्यार की जरूरत है ! कैसा किरण ..?

प्रेम -खुद से पूछ लो कैसा प्यार की मुझे जरूरत है ! क्या मै इसी सपने के साथ
दिल्ली आई थी! याद है तुम से एक बार हम से पूछी थी .. क्या तुम मुझे छोड़ तो नहीं दोगे !

किरण ..अब तो ऐसा लगता है ,,, मानो या ना मानो तुम्हे प्यार हो गया है ! तस्बीर से पूछो.. तुम बाहर निकल कर आ जाओ ! क्या ये
भी एक दीवानगी है .. क्या तुम इसे सच में बदल सकते हो !

कुछ बक्त तो दो ! और ऐसे भी मै एक पागल इन्सान हू ..क्या पता एक दिन इसे सच में बदल दू ..! ऐसे भी मुज में सरीफ , सिगरेट और लड़की जैसा कोई ऐब नहीं है ..! तो क्या बता दू ----अब फैसले लेने का बक्त नजदीक आ गया है !!

शुक्रिया

सिर्फ और सिर्फ.... उमीद के साथ .?
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2 टिप्‍पणियां:

  1. फिल्मी अंदाज सही फिट हो गया है.

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    यह अत्यंत हर्ष का विषय है कि आप हिंदी में सार्थक लेखन कर रहे हैं।

    हिन्दी के प्रसार एवं प्रचार में आपका योगदान सराहनीय है.

    मेरी शुभकामनाएँ आपके साथ हैं.

    निवेदन है कि नए लोगों को जोड़ें एवं पुरानों को प्रोत्साहित करें - यही हिंदी की सच्ची सेवा है।

    एक नया हिंदी चिट्ठा किसी नए व्यक्ति से भी शुरू करवाएँ और हिंदी चिट्ठों की संख्या बढ़ाने और विविधता प्रदान करने में योगदान करें।

    आपका साधुवाद!!

    शुभकामनाएँ!

    समीर लाल
    उड़न तश्तरी

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  2. भाई बहुत अच्छा पर इतना भी इन्तजार मत कराओ..

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