हर किसी को कभी न कभी किसी न किसी से प्यार होता है। चाहे वो प्यार बचपन में हो, जवानी में हो या फिर बुढ़ापे में प्यार तो बस हो ही जाता है। जब प्यार होता है तो उसे एक्सप्रेस करने के लिये कोई ठोस शब्द नही होता है। कई अपने प्यार का इजहार कर देते हैं तो कई अपने मन में ही दबा देते हैं।
प्यार का एक वाक्या बताता हूं। आपको शायद पसंद न आये लेकिन है इंटेरेस्टिंग। एक बार एक संस्थान में एक शिक्षक कक्षा लेने आये। कक्षा के अंत में शिक्षक ने अपने मन की बात जाहिर की। उसने मुस्कुराते हुये कहा जब मैं अपने घर से संस्थान के लिये चला तो रास्ते में एक गीत सुना। मनोज कुमार की फिल्म का गीत - वो जवानी जवानी क्या जिसमें प्रेम कहानी न हो। यह सुन कक्षा में उपस्थित छात्रों के जैसे मन की मुराद पूरी हो गयी। यह बात छोटी थी लेकिन असरदार थी। जो छात्र प्यार को अपने मन में संजोकर रखे थे उसे अंधेरे में एक किरण दिखायी दी। कुछ छात्रों ने पुरजोर इसका स्वागत किया तो कुछ ने अपने नाक भौं सिकोड़ ली। जिसने अपने नाक भौं सिकोड़ी वे ऐसे छात्र थे जो लड़कियों को हिकारत की नजर से देखते थे।
वे लड़कियों से बात करना अपने शान के खिलाफ समझते थे। और वे छात्र जिसने इस बात का समर्थन किया वे कहीं न कहीं अपने मन में प्यार के बीज बोये हुये थे। उन्हें बस इंतजार था ऐसे ही किसी पल का जिसमें कोई उसका साथ दे।
अब शिक्षक के तरफ से हल्की सी मंजूरी मिल जाने के बाद संस्थान परिसर में जोड़े दिखने लगे। पहले युगलों में बातें सिर्फ क्लास तक ही सीमित रहती थी। अब पत्थरों के टीले में बातचीत का सिलसिला बढ़ने लगा। दूरियां घटने लगी और दो दिल मिलने लगे। इन सब के बीच मैं अपने आप को अकेला महसूस करने लगा। ऐसा नही है कि मुझे कोई अच्छी लड़की नही मिली। मुझे बहुत अच्छी लड़की मिली जो दिल की बहुत साफ थी। उससे मेरी दोस्ती बहुत गहरी हो गयी थी। वो मुझपर सारे जहां से ज्यादा विश्वास करती थी। हालात ऐसे बन गये थे जिससे मैं अपना प्यार जाहिर करने से घबराता था। कारण सिर्फ एक ही था कि वह मुझसे नाराज न हो जाये।
हमारी दोस्ती गहरी हो गयी थी और दोस्ती में एक दुसरे की मन की बात भांप ली जाती है। उसने मेरे मन की बात जान ली। उसे यह भी मालूम था कि मैं कभी अपने प्यार का इजहार उसके सामने नही करुंगा। अब यह समय था अपनी दोस्ती निभाने का उसने अपनी दोस्ती बखूबी निभा दी। उसने शुरु से अंत तक पूरी बात कह डाली जो मैं कहना चाहता था। मैं अंत तक चुप रहा और उसकी बात सुनता रहा। लेकिन अंतिम पल में उसने मुझसे कहा कि अब तो बोल दो। मैंने बहुत कायदे और सलीके से उसे अपने प्यार का इजहार किया। मेरे इजहारे प्यार का गवाह चांद व तारे बने साथ में .... पौधा जिसके सामने प्यार का इजहार किया था।
प्यार की बातें खत्म हो गयी
, रह गयी सिर्फ वो पल और उससे जुड़ी याद जो जीवन भर जेहन में रहेगी। सच में वो बहुत ही यादगार पल थे और हो भी क्यों न उस पल में मैंने अपने प्यार का इजहार किया था। जिसका जवाब मुझे मिला - प्यार दोस्ती को निगल जाता है। हमारे बीच में सिर्फ और सिर्फ एक बहुत अच्छी दोस्ती थी। हमारी दोस्ती को प्यार ने निगलने की कोशिश की लेकिन कामयाब नही हो सकी। इसका सबसे बड़ा कारण था हमारी सच्ची दोस्ती, जिसे जींदगी भर निभाना था।
हर किसी के जिंदगी में ऐसे पल आते है जिसे सही फैसले न ले पाने से जींदगी भर पछतावा होता है। मैंने उस समय बहुत ही सही फैसला लिया और अपनी दोस्ती बचा ली। ऐसी स्थिति में लोग टूट जाते है। इसका कारण यह होता है कि वे इंकार को बर्दाश्त नही कर पाते है। ऐसी स्थिति में वे अक्सर गलत फैसला ले लेते है और जींदगी भर पछताते रहते है। उनका गलत फैसला होता है वो प्यार नही करती तो उसे भूल जाओ। उनको समझना चाहिये कि प्यार किया जाता है किसी पर प्यार थोपा नही जाता है।