शनिवार, मई 23

दर्द उसका क्यों जाने दुनिया !! चाह है "पेट" देखने की (अंक -1)


यह कोई बात 'शाम-ए अवध' की नहीं। बल्कि देश की राजधानी की। जहां क्या-क्या होता है
और क्या न होता है यह बताने की जरुरत नहीं !! क्यों कि यह तो अमूमन कुछ न कुछ हम
सभी को पता है।

लगभग सवा करोड़ की आबादी में यहां भले ही सुबह से लेकर शाम तक इंसान
की जिंदगी में भागम भाग रहती हो। लेकिन रही बात जिन्दगी की शुरुआत की तो ।
जानते है-** नंबर एक **

बात कर रहा हूं मासूम , नाजुक सी ओरत , बहुत खूबसूरत मगर सावली सी की। नाम पूछने पर बताती है अपना 'रजिया बाई'। काम और इस फटे हाल के बारे में पुछने पर वह बोलती है! 'दर्द को दर्द से न देखो, दर्द को भी दर्द शुरू हो जाएगा'।

सूर्य की पहली किरण पड़ने से पहले पेट में पल रहे 7 महीने के गर्भ और मुह बोले बच्चे को लेकर 'आईआईटी' गेट के रेड लाईट पर बाबू लोगों की गाड़ियों पर पोछा मारना शुरू करती हूं। वो भी कब तक रात के सन्नाटे तक।

एक सवाल के जवाब में वह बताती है। या 'खुदा दो पल की मोहलत और दे दे'। कुछ और बाबू लोगों के पास अपनी पेट दिखाकर 2, 4 रुपये जमा कर लूं। इस तेज गर्मी में क्या बाबू लोगों की 'तुम्हारी दर्द की कोई फिकर है'? क्या बोलू जी-
इन बड़े साहबों की दिल में तरस है, तड़प है और बहुत बेचैनी है। मुझको देखने की।

उन्हे भूखे पेट की तरस नहीं उन्हें तो मेरे उठे पेट देखने की ललक है। एक अजीब सी तड़प है मेरे लिए। कोई हंसता है तो कोई आंखे मल मल कर देखने को बेचैन है। मुफ़्त में कहां मिलेगी। बदले में देते है क्या है 1 या 2 रुपये।

वह बताती है-और तो और अगर इन बड़े बाबुओ की भावना को समझों तो क्या बताऊं शर्म आती है बताने में भी।भले ही साहब जी अपनी मेम साहिबा के सामने शर्म करते हो ,जो कि उनकी अपनी है। मगर मेरे इस हालत के बदन के रूप देखने के आगे तो 'साहब लोग' अपना शर्म तो तख्खा पर छोड़ आते है।

इस बुरे हाल के मलाल के बारे में पूछे जाने पर -कुछ देर बेफिक्र दिखाई देने के बाद बोलती है। सब कुछ खुदा पर छोड़ दिया हूं। खुदा को शुक्र है। हर मुसीबत में उसी की याद करती हूं। देखो रेट लाइट हो गया अब जाती हूं। आ रही हूं तब बात करना।


(अगला अंक बहुत जल्द)

वो तुम से कम "थोड़ी" ही है !!! (पटियाला -"नजमा" अंक -7)


दर्द शक्लों में भले ही अलग-अलग हो दर्द की कसक एक ही जैसी होती है।
रही बात हमारी तो परिवर्तन का दौर तो हरेक की जिन्दगी में आता है और चला
जाता है। कुछ इस अंदाज में अगले दिन सुबह सुबह 9 बजे के करीब आवाज
गूंजी।

और जी, 'नाजिया' से कल रात की बात हुई थी? अंदाजा लगा सकती हो
उलटी खोपड़ी की लड़की से क्या बात हुई होगी। वो तुम से कमतर 'थोड़ी' ही है।
नाजिया तुम्हारी-मन स्थिति का रहस्योद्घाटन कर रही थी।
क्या?
हां ठीक बोल रहा हूं। वो बता रही थी 'बेबसी और बेचारगी' की तस्वीर हो
तुम। उसने तुम्हारी जिंदगी की तल्ख सच्चाईयों को उड़ेल कर रख दी है।
उस वक्त यह बोल कल हंसने लगा था।

मेरे अजीज-मेरी जिन्दगी के रोज-ए हश्र पर मत हंसो। कभी -कभार
हंसी नकारात्मक भावनाओं को बोझिल कर देती है। वक्त -वेवक्त परिस्थितियां
और स्थितियां जीवन में बदलती रहती है।

बुदबुदाते हुए बोली-तुम्हे मेरे प्रति फर्ज की शर्म कब आएगी। पिछले 11
महीनों से कूच-ए दिलदार में आकर मुझ से गुलछरे उड़ा रहे हो और बोलते
हो की मैं तो कुछ जानता ही नहीं हूं।
बिलकुल सही बोली। तुम्हीं बताओं अभी तक कुछ भी बताई है अपने बारे में?

वह व्यथित हो कर बोली यह तो मेरी बदकिस्मती है जो आप से नहीं बताई।
यह बात सुनकर कई तरह की भावनाएं उठना लाजमि था। गहराती वातावरण
की सर्द उदासी की खामोशी तोड़ते हुए बोली।

अजीब धर्म संकट है। हालांकि अपने जीवन के इस असलियत राज को तोड़ना नहीं चाहती
थी लेकिन अब बताना होगा। ठीक है मैं बताती हूं, मगर मेरी 'जगहसाई' मत
करना।

कितना 'नाजुक है मेरा दिल' यकीन करो। मैं न उसके ऊपर कितना विश्वास किया।
उसका नाम 'अरुण' ** था? इतना बोल कर वो चुप हो गई थी।
हालांकि उसे अपने हकीकत बाते बताने में उसकी जिंदगी की तल्ख सचाईयों
से बिलकुल अचरज नहीं हो रहा था। हालांकि उसकी असलियत का अहसास होने के
बावजूद बेफिक्र था। ऐसे में अपने दिल के भावों को शब्दों में पिरोते
हुए लब खोलना ही चाह रहा था कि उसकी फोन की घंटी बजी।

फोन देख कर उसकी गुलाबी चेहरे पर चमकती पसीने की बूंदे लाल गई थी।
बड़ी ही मासुमीयत से बोली मेरी अम्मी का फोन है। मुझे जाना होगा।
बिलकुल उदास मन से यह बोल कर चली गई कि 'अच्छा जी' चलती हूं । उस
'अरुण' के बारे में कल बताऊंगी ।

(अगला अंक बहुत जल्द)**

शनिवार, मई 2

'हां और ना वाली बात मत करो '!!! (पटियाला- "नजमा" अंक-6)


उस रात खाली वक्त में अपनी तन्हाइयों को किसी पुस्तक से बहला रहा था। हालांकि मुझे याद था, लेकिन उस वक्त यह बिलकुल याद नहीं था कि मुझे आज रात किसी के दिए हुए वादे के मुताबिक फोन पर बात भी करनी है।

बहरहाल अभी यह सोच ही रहा था कि उधर से फोन की घंटी बज गई। हैलो का जवाब में उधर से बिलकुल निहायत तहजीबी अंदाज में -जी मैं 'नजमा' की बहन बोल रही हूं ,'नाजिया'? आप मुझ से बात करना पसंद करेंगे। आपके बारे में सबकुछ पता है। मैं आपके बारे में सबकुछ जान चुकी हूं। जनाब जानते हैं आज आपको मैं एक राज की बात बताने वाली हूं।

हो सकता है आपने अपने दोस्त 'नजमा' से आज तक नहीं कहे हो कि वह आपके लिए क्या मायने रखती है। मैं जानती हूं आपको बताने में संकोच आड़े आता होगा। मेरी बातों को पूरी गंभीरता से सुनों ! यह सारी बाते बिलकुल एक सासों से बोल गई थी।


फिर अचानक बोली, क्या मैं जान सकती हूं 'नजमा' से आपकी पहली मुलाकात कब हुई थी? मैं यह सोच कर हैरान हो रहा था कि इसे क्या जरूरत पड़ गई यह बात पूछने की। आखिर इस पंजाबी क़ुडी के दिमाग में क्या चल रहा है। आखिरकार बोला , अगर मेरी याद सही है तो शायद मेरी पहली मुलाकात 11 सितम्बर 2008 को हुई थी। अच्छी बात है। जानते है वो बिन फेरे हम तेरे की विचारधारा में यकीन करती है। क्या जाने अनाजे में कुछ गलत तो नहीं तो बोल गई। नहीं- नहीं मैं बोल रही थी कि वो हमेशा आपकी तारीफ करती है।

इसमें कोई संदेह नहीं था कि 'नाजिया' तो एक बहाना थी, बल्कि यह बात तो 'नजमा' की कही कहाई कहानी थी। देखो जी हम एक अच्छे दोस्त के अलावा कुछ नहीं हैं। मेरी बात सुनो अब आप दोनों को बिगड़ते रिश्तों की इस इमोशनल अत्याचार करने वाले मार्डन जमाने में इस रिश्ते को स्थिरता प्रदान करने का वक्त आ गया है। क्या मैं सच बोल रही हूं। क्या यार बेकार की बातें किया करती हो। हां मैं ठीक बोल रही हूं। आप नहीं जानते, वो हमेशा आपकी खूबसूरत अहसासों में डूबी रहती है। मेरी बात सुनो 'नाजिया' ऐसा कुछ नहीं है। हम एक अच्छे दोस्त के अलावा कुछ नहीं हैं।

अगर मैं यह कहूं कि अभीतक गम को छुपाने का यह एक नया ट्रेंड था तो यह गलत न होगा। कहा जाता है कि कभी-कभी लोग नाचते हैं गाते हैं, खुशियां मनाते हैं लेकिन दिल में एक दर्द रहता है जो लाख कोशिशों के बावजूद दिख ही जाता है।

खामोशी क्यों अख्यिर किए हुए। दरअसल अभी तक 'नजमा' को आप ने जाना ही नहीं । वो अंत तक अपनी किसी उम्मीद को खत्म नहीं होने देती। मैं तो सिर्फ एक बहाना थी इतनी देर रात बाते करने का। मेरी बात सुनो। तुम सही बोल रही हो अभी भी मैं 'नजमा' के बारे में कुछ भी नहीं जानता हूं। हालांकि उसने 'मुझे डुबोया मुझको होने, न होता तो क्या होता'? ओए मुझे नहीं अपनी बेगम साहिबा को मिर्जागालिब का डालॉग सुनाना। रह रह कर कई मौकों पर उसकी आवाज वेहद भावनात्क और दिल को छू लेने वाली थी।


मैं चुप था, लेकिन वो बोलती जा रही थी। आखिरकार मैं बोला देखो, मुझे वो लोग गंदे लगते हैं। पसंद-नापसंद का झगड़ा कई बार इस प्रकार की दोस्ती में दरार की वजह भी बन जाती है। खासतौर पर तब जब कुछ इस तरह की बाते हो। प्यार को समझने के लिए वक्त और गहरी सोच की जरूरत होती है, यह बताना मैं जरूरी नहीं समझता, लेकिन प्यार विशिष्ट होता है और किसी बच्चे की तरह ही मासूम प्यार आपके हंसेन और खुाश रहने का कारण देता है।

मैं बोल ही रहा था कि उसने बीच में टपक पड़ी, और बोली मुझे पता है आपको हां और ना के दोहरे अंदाज में बात करने की आदत है। इस जमाने की लड़का और लड़की का प्रेम और दोस्ती को लेकर नजरिया एकदम साफ है और खासकर पंजाब की लड़कियों को तो इसमें पूछों ही मत।


मैं आप दोनों की हदों को बखूबी जानती हूं। इसे बताने के लिए किसी से पूछने की जरुरत नहीं समझती। मैं जानती हूं इतनी गहरी दोस्ती का इतना सधारण अंत और इस ढंग से नहीं हो सकता।

सचमुच जी, यह बात बिलकुल सोलह आने सच बोल रहीं है कि आज के दौर में तमाम संबंधों पर दोस्ती भारी पड़ने लगी है। यहां तक कि खून का रिस्ता भी इसके सामने फीका पड़ने लगा है। मुझे तो अब नजमा के जगह आप में संभावना नजर आने लगी है। ओए पागल हो क्या। क्या बोलू ! तंग करने का तुझसे नाता जो है 'गुंजा'

उसने वेहद निहायत भोलेपन से बोली कितना बेशर्म हो, देखो मैं आपकी प्रेमिका की खातिरदारी नहीं कर रही हूं। सच्चाइयों से मुंह क्यों मोड़ना चाहते हो। मैं जानती हूं तड़प दानों में है बराबर का, न जाने किसका दर्द है जादा , यह मैं भले ही न बता सकती। एक बात और इस पीड़ा को कुछ नाम देना पसंद करोगे। यह बोल कर वो हसने लगी।

देखो नाजिया अभी मैं नहीं समझ पाया हूं कि आखिर क्या वजह है , या क्या मजबूरी है कि वो हम से क्यों बात करती है। ओए! कुछ तो ऐसी बात रही होगी जो वो तुम से बात करती है। अच्छा तो ये बात है अभी तक आपको यह भी नहीं पता। तो ठीक है, क्या है वजह उसी से पूछ लेना। लेकिन आप उससे क्यों बात करते हो। पहले वो बताए तब मैं भी बता दूंगा। क्या सबकुछ शर्तो पर। चलो अच्छी बात है। वो आपकों कल सबकुछ बता देगी वो आपसे क्यों बात करती है। मेरी बात आपकों समझ में नहीं आया जबकि सबकुछ कह देने के बावजूद।

(अगला अंक बहुत जल्द !!)