रविवार, नवंबर 22

Next stop, Delhi (अंक -5). नाम कांबली है तो मराठी ही ...?.

"नेक्स्ट स्टॉप दिल्ली"!!
नोट- भले ही यह कहानी सच के करीब लगे, लेकिन यहां ये कहना लाजिमी है कि इसका किसी लड़की या घटना से सीधे-सीधे कोई लेना देना नहीं है। कहानी में आई घटना का किसी लड़की-विशेष की जिंदगी से मिलना महज एक संयोग हो सकता है!!!

.......हालांकि यह प्रेम की जिन्दगी की सबसे बड़ी भूल थी॥ ...मगर अब कर भी क्या सकता था .. और दूसरी बड़ी भूल यह थी की यह बात खुद भी अपनी किरण को बता दिया..यह ढक्कन दिमाग का खामीयाजा था ..यानि अब...... गड्ढा खुद खोद लिया था और अब यह सिर्फ गिरने से बचने का परयास भर था.. ..



क्या तुम किरण को जानती हो..किरण यानि अपनी "नेक्स्ट स्टॉप दिल्ली"! ? मेरे इस सवाल के जवाब में कांबली ने अचानक अपनी सावली सलोनी मगर बेहद खूबसूरत चेहरे पर बालो को सवारते हुए बोली, तुम किरण के बारे में क्यों जानना चाहते हो ? वह समय जिसमे हम न कुछ कह पाए और न समज पाए ..यह वाक्या आज से चार दिन पहले की है !

मेरे इस सवाल के जवाब में उसने बोली थी, तुम किरण के बारे में क्यों जानना चाहते हो ? वह समय जिसमे हम न कुछ कह पाए और न समज पाए ..!

इससे पहले मै यह सोच कर इस कांबली से बात करना शुरु किया था की .वह किरण की बचपन की दोस्त थी ..बात करने का मकसद सिर्फ और सिर्फ किरण के बारे में जानना इसके सिवा और कुछ नहीं था ..सोचा था नाम कांबली है तो मराठी ही होगी....और इस कांबली मुलगी से जादा किरण के बारे में जादा कोन बता सकता है.?

काम्बली की लबो से निकली एक एक सब्द ऐसा लग रहा मानो सब कुछ वो अपनी किरण के बारे में जानती वो ..और वो और वो उसके बारे में कुछ भी बोलना पसंद नहीं .. उसकी हेरक बातो में एक रहस्य छुपा था ! उस बक्त उसकी बातें फुरसत का वक्त काटने या दिल बहलाने वाली नहीं थी। लवों से निकली हुई उस सावली सलोनी काम्बली की हर बात दिल को कचोटने, पिछले 24 सालों के दौरान पढ़ी और लिखी गई वुद्धि को झंकझोड़ कर रख देने वाली थी।
अभी यह सोच ही रहा था की काम्बली बोली- प्रेम तुम मुझे कितना जानते हो ? अपने दिल की भावों को सब्दो में पिरोतो हुए मैंने अपने लब खोलना ही चाह रहा था की जेहन में किरण यानि अपनी "नेक्स्ट स्टॉप दिल्ली"! की तुनुकमिजाज आदत के भय के डर से खुद को रोक लिया.... सिर्फ इतना ही बोल पाया जितना खुद को नहीं जानता उस से कंही जादा आपके बारे में जानता हू ,, यकीन न हो तो पूछ कर देख ले !
फिर भी काम्बली ....-आपकी नजरो में मै भले ही एक अजनबी हू ...मगर हर सुबह रास्ते पर..हम .दोनों मिलते है ..मैं भी...मेरा साया भी बस हम दोनों में इतना ही दुरिया है आप शाम को अपने घर लोटते है और मै अपने घर ..डेल्ही और मुंबई ..यह दोनों का हर रोज़ का नियम है ..लेकिन मेरा साया आपके पास रहता है हा हा हा ...हलाकि मै अभी तक आपको नहीं देखा हू ..
काम्बली जी, यह मुझे पता है हम दोनों की यह बाते उसे जिस दिन मालूम होगा वह मुज से नफरत करने लगेगी .. लेकिन मै उसे अपनी जिन्दगी के अंतिम पड़ाव तक मनाने का परयास करूँगा .. क्यों कि मै उसे खोना नहीं चाहता ..मै उसे प्रेम करता हू ..वो मेरी जिन्दगी है ..सब कुछ है वो मेरी ..!

न जाने उस बक्त क्या क्या बोल दिया था ..मेरी बेचैनी बढती जा रही थी ..बहरहाल ... मुझे बैचनी के लिए थोड़ी देर के लिए राहत तब मिली जब उसने यह बोली की .. बाबू कुछ देर में बाद बात करती हू..या हो सके तो मुझे मेल कर दो तुम्हारी क्या कहानी है .....

कुछ देर क्या यह तो घंटो बीत गया ! फिर न तो काम्बली का चेहरा दिखा और न उसका साया ..चार दिन तक उसका इंतजार करता रहा .. हर घंटे और हर दिन एक मेल करता रहा ..रह रह कर उस मुलगी के परती नफरत बढती जा रही थी .. क्यों कि अब वो नजरो से ओझल गई थी ! हर दिन उसका इंतजार करता था !.. अगर मै गलत

मै गांव का गांवारा था ! जिन्दगी में फर्स्ट टाइम इतना बड़ा शहर में कदम कदम रखा था ..जिस किसी से बात करता उसमे एक अपनापन लगता था ..उसमे एक रिश्ता नजर आता ..! उस रात को नींद भी नहीं आई थी..फिर किरण ने प्रेम से बात करना भी बंद कर दिया था ..आखिर में उसने काम्बली को मेल किया . --किस बात का... क्या दिक्कत हो गई है......... ?

आप उससे कहिए कि क्या मैंने कभी तुम्हें ये पूछा है कि तुम लंच में कैंटीन में किसके साथ प्लेट शेयर करती हो... क्या मैंने तुमसे पूछा कि तुम क्लास में किस लड़के के साथ बेंच शेयर करती हो.. उससे पूछें कि क्या मैंने तुमसे कभी पूछा है कि तुम और लड़कों से बातें क्यों करती हो... अगर ऐसा कुछ नहीं है तो फिर नहीं तो वो मुज से बाते करना क्यों बंद कर दी ..

मै कुछ भी गलत नहीं ..किया .. मै काम्बली से कुछ भी गलत नहीं बोला हूँ ...फिर किरण ने यह क्यों किया ...वह यह फैसला ले कि किससे बात करेंगे और किससे नहीं... कल को वो कहेगी कि आप फलां फलां लड़के से बात नहीं करो क्योंकि इससे कही आप के वो वाले र्रेलेशन है तो नहीं हो गए और दोस्ताना टाइप का रिश्ता तो नहीं है...........

काम्बली ने इसका जवाब देना भी मुनासिब नहीं समझी ..हर दिन कि तरह प्रेम काम्बली से बात करने के लिये लिए उतुसुक था. लेकिन मालूम नहीं काम्बली कि क्या मजबूरी थी .. वो उसे बात नहीं कर रह थी......रोज कि तरह आज भी प्रेम कि आँखों में नींद कोसो दुर था ...वह सोच रह था ....सायद समय के आभाव में काम्बली मुज से बात नहीं कर रही है ....उसे किस परकार बोलू किस परकार उसे निवेदन करू है की..आप मुझे कुछ देर टाइम दे ...... आपकी यह भावनात्मक रूप से किया गया मदद..मेरी जिन्दगी फिर से वापस मिल सकती है ............अगर मै इस जंग में जित गया .. तो सारी उम्र आपका .....मेरे ऊपर कर्ज रहेगा .........................!!!

अगला अंक बहुत जल्द...
फोटो गूगल ...

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