
दिन के 11 बज चुके थे। कुछ अनहोनी के डर से मेरा दिल धुक-धुक कर रहा था, पता नहीं वह आएगी या नहीं। कहीं कुछ अपनी जिंदगी से कुछ कर बैठी क्या? हालांकि कल जाते वक्त वह बोल कर गई थी, सोमवार से मैं नहीं आ पाऊंगी, लेकिन आप से कुछ विशेष बात करनी है इसलिए मैं जरूर आऊंगी।
मेरे मन में उसके प्रति आज अनेक तरह के गंभीर बाते आ रही थीं। कभी-कभी मैं यह सोचकर परेशान हो रहा था। क्या वह पागल है या मैं पागल हूं। जो भी रहा हो, भले ही किसी मुद्दे को लेकर हमदोनों में नोंक-झोंक होती हो। लेकिन शाम होते होते और-घर जाते समय अक्सर हमदोनों एक-दूसरे की गलती माफ करके यह बोलना नहीं भूलते थे कि अपना ख्याल रखना।
अब तो यह रोज की आदत बनती जा रही थी। यह बात मुझे नहीं मालूम की यह बात मैंने शुरू की थी या उसने। वहीं दिन भर हम दोनों के बीच यह आरोप खूब लगते थे कि आप कौन होते हो यह सब जानने वाले। जबकि मैं उसे और वो मुझे यहां तक बताने से परहेज नहीं करते थी कि आज मैंने क्या खाया है, तुम्हारा शर्ट का बटन किस रंग का है, तुम आज बस से सफर कर रहे थे, उसका नम्बर क्या था। यह जानकर क्या करोगे, इतना सब कुछ होने के बावजूद वो मेरा और मैं उसका उसका हमेशा एक दूसरे की भावना का कद्र किया करते थे।
जनवरी के महीने में भी उसके इंतजार ने मुझे गर्मी का आभास दिला दिया था। मैं अपनेआप को बिल्कुल अकेला और असहाय अनुभव कर रहा था। हालांकि मुझे याद नहीं किसी ने मुझे कहा था,' जिंदगी में अगर कभी कोई साथ न हो तो खुद को ही अपना दोस्त समझना। खुद ही अपना दुश्मन और खुद ही अपना सच्चा दोस्त होता है'। शुरूआती दिनों में जिस 'नजाम' के बेलाग और बेबाक अंदाज से मैं अक्कसर डरता था। मुझे अब ऐसा लगने लगा था, बेबजह मैं डरता था।
बहरहाल इतना होने के बावजूद क्या गुंजाइश है उसमें सब्र दिलाने का। अभी यह सोच ही रहा था कि मेरे कानों में एक दिलकश आवाज आई 'रुक जाना नहीं तू कहीं हार के, कांटो पे चलके मिलेंगे साए बहार के'। यह आवाज भले की किशोर दा की रही हो। लेकिन अभी जो मैं आवाज सुन रहा था उसी 'नजमा' की थी। अपनी आदत के मुताबिक वह बिंदास अंदाज में बोली। "हाय, क्या हाल है। अपना चेहरा आईना में देखा है। ब्रेकफास्ट किया की नहीं। आज बस से आया। कोई परेशानी तो नहीं हुई थी, घर में तो सब ठीक है। आप जानते हो आज कालेज में डिग्री लेने चली गई थी सो रास्ते में लेट हो गई। और यह बात मैं कल बताना भूल गई थी। एक ही सास में बोल गई। और उसके सारे सवालों का जवाब मैं भी एक ही सास में उसी के अंदाज में दे दिया।
दूसरी लड़कियों की तरह वह भी व्यथित हो कर बोली, 'मैं नहीं आई थी तो तुम क्यों नाराज हो रहे थे'। आखिर आपकों क्या लेना देना है मुझ से। मैं भी अपने पैतरे बदलते हुए अपने लहजे में बोला बहुत 'बावरी' हो तूम। भगवान का शुक्रगुजार हूं तुम आ गई वरना मैं आत्महत्या करने वाला था। इस पर बोल पड़ी, यह तो आपकी मर्जी है आप जो करो। आप आत्महत्या करों या और कुछ और मुझे क्या लेना देना। इसके बाद उसने सब्र तोड़ते हुए बोल पड़ी आपके दिल में आत्महत्या करने के विचार कब से आए, यह तो मेरे दिल में था। और यह विचार तो बड़े ऊंचे और पवित्र हैं। बहुत विचित्र हो इंसान हो आप। मुझे तो आप पर हसी आती है। अगर यह बात सही है तो मैं यह सारी बाते तुम्हारे घर वालों को बता दूंगी।
दोबारा यह सब बोला न तूम समझ लेना। अब मैं जो फिर से एक खुशनुमा दुनिया में लौटी हूं वह सिर्फ तूम्हारे वजह से और तूम यह बोल रहे हो। मैं कहीं भी रहूं, मुझे अपने पास ही पाओगे। मैं भी उसी के लहजे में जवाब दिया, 'हे सुनो ना' 'मैं न तो तुम्हारे साथ रह सकता हूं और न ही तूम्हारे बगैर'। तुम में इतनी कशिश है कि तुम्हारे साथ मैं नहीं रह सकता। ओए पागल हो क्या। तुम भी कम नहीं हो। मुझे तो ऐसा लगता है अब तुम्हारे रग-रग में मेरा दिवानापन बढ़ता जा रहा है। अच्छा जी! दिल्ली में कमी है क्या?
पहली ही बार में, पहली ही नजर में मुझे देखकर पागल हो गए। ऐसे तुम जानते हो तुम्हारा खूबसूरत और खतरनाक जिंदगी मुझे पसंद है। तुम मुझ से बात करना चाहते हो न तो एक शर्त है मेरी। तुम यदि मुझमें अपना कोई रिश्ता पाओ तो मुझे नाम दे सकते हो। जो भी तुम्हें प्रिय लगे। मिसाल के तौर पर बहन जी, भी हो सकता है? यार पागल हो तुम। अभी-अभी आई हो और दिमाग खराब करने लगी। किसी दूसरे दिन पूछ लेना। अब नाराज मत होना। और एक बात और सुन कर जाओ जमाना खराब है, 'नकाब' लगा कर निकला करो। अपने चेहरे पर खूबसूरती बिखरते हुए बोली पागल 'रोलू'। कल बताता हूं। मेरी 4 बजे की बस छूट जाएगी।।
अगला अंक बहुत जल्द !!!
ये गुमनामी के अंधेरे में जीने वालों के लिए रास्ते बंद करो। एनोनिमस टिप्पणियों को प्रकाशित न किया करो।
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