शुक्रवार, अप्रैल 17

वह दर्द जो कभी ‘‘सर्द’’ न हो पाए!!! (पटियाला ‘‘नजमा’’ अंक-5)


आज हो सकता है कि उसके कदमों से मर्यादा की दहलीज लिपटी हो। फिर भी मैं यह सोचकर चिंता मुक्त था कि प्रेम के क्षेत्र में समूचे पंजाब के कुड़ियों का क्या कहना। यहां तो इस क्षेत्र में अवैतनिक विशेषज्ञ माने जाते हैं। प्रेम के मामले में उनकी तूती बोलती है। इस बारे में मेरा निजी अनुभव है। यह किसी से पूछने या इसके लिए किसी सूत्र की आवश्यकता नहीं।


दुनिया दा है प्यारा !! और जी की हाल है। एकाएक आते ही मुस्कुराती हुई अपने ही अलग अंदाज में संजीदगी से इरशाद किया। हालांकि अभी मैं सिर्फ इतना ही बोला था कि ‘जिंदा हूं’। इस पर उस उसने बहुतही हीबेबाकी से बोल बैठी। वेरी बैड ! आप जिंदा हो।

ओ सॉरी यार। हम अपने सबसे करबी दोस्त को ऐसे दिन और ऐसे वक्त में और ऐसा बोल दिया। वो न मजाक मजाक में कभी-कभी बोल जाती हूं। आ तो खुश हो जाओ।

हालांकि इस बात को मैं बिलकुल नजरअंदाज कर दिया था कि लेकिन फिर भी सोचा चलो इसी बहाने आग लग ही गई है तो क्यों ने थोड़ा जलाया जाए। आप जो बोली हो शायद बिलकुल सच बोली हो। अभीतक बेहद खूबसूरत थी हमारी जिंदगी लेकिन आपने यह बोलकर बदनुमा और बदरंग कर दी। मैं जा रहा हूं।

अपनी मादक निगाहों में माटे मोटे आसू टपकाते हुए बोली, आप एक छोटी सी बात पर आज का दिन यू बर्वाद कर दोगे। आज जानते हो कौन सा दिन है। शनिवार।। नहीं यार वैलेंटाइन डे है। उसके चेहरे पर बेवसी और बचारगी की नई तस्वीर देखकर मुझे ऐसा लगने लगा था कि वह जो बोली है उस पर उसे अफसोस है। कुछ देर की खामोशी के बाद आखिरकार मैं बोला तो आज का क्या प्लान है? क्या...?

आप मुझ से पूछ रहे हो। वो न आज सोची थी कि आज खुल कर बातें करेंगे। और आज वो बात बोलनी भी थी, जो शायद मुझे बहुत पहले बोल देनी चाहिए थी। और कुछ..।

हालांकि यह बात वह निहायत तहजीबी अंदाज में बोल रही थी। मैं भी स्थिति को भांपते हुए अपनी मजाक के आदत के मुताबिक बोला। ‘महारानी साहिबा’ आज आप इस कपड़े में बिलकुल ‘नई नवेली दुल्हन के सिंदूर की तरह खुल्लमखुल्ला चमक रही हो’। क्या कहीं जाना है? क्या यार मजाक उड़ाते हो। एक तरफ परंपरा के गलियारों में और दूसरी तरफ शॉट और बिकनी के दौर में भी मैं सलवार शूट ही तो पहनती हूं। डर जो है। किससे! एक है ‘पागल’ जो रहता है मेरे शहर से काफी दूर उससे !!

मुझे कोई एतराज नहीं। उसका बचपना और भोलेपन चेहरा देखने से ऐसा लग रहा था कि वह आज बहुत व्यथित है। वह बोली। दोस्त आज का दर्द शायद जीवन में कभी सर्द नहीं हो पाए। आखिरकार मुझे इस अंतिम क्षणों में कुछ बोलना जरूरी समझा। माशा अल्ला। आप खूबसूरत हो, जीनियस हो और बेहद खूबसूरत दुनिया में जी रही हो। और रही बात एकदूसरे की जानने की तो आ वो वक्त खत्म हो गया। हम दोनों को एक दूसरे को देखने की नहीं दिल में उतरने की जरूरत है।

क्यो झूठी तारीफ करते हो। आपको बोल देने से मैं खूबसूरत नहीं हो जाऊंगी। मेरी बात सुनो, आज रात ठीक 12 बजे फोन करना कुछ जरूरी बात करनी है। अभी कहना बेहद कठिन है। और हां उस समय आप ‘‘मुझ’’ से नहीं मेरी ‘‘बहन’’ से बात करोगे। यह बात सुन कर मैं हैरान था कि रात 12 बजे कौन सी जरूरी बात है। और वह भी किसी और से। लेकिन वह जो बोल रही थी इससे मुझे ऐसा लगने लगा था कि उसके साथ कुछ न कुछ बेवसी है। बेसक बात करूंगा। शुक्रिया। मैं इतंजार करूंगी।

(अगला अंक बहुत जल्द!!! आखिर नजमा कौन थी?? और वो कौन सी बात थी जो वह अपनी बहन से से कहलवाना चाहती थी!!)

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