बॉलीवुड में अमिताभ बच्चन, हेमामालिनी और राजेश खन्ना सहित अनेक फिल्मी सितारों को शोहरत की बुलंदियों पर पहुंचाने वाले व भारतीय सिनेमा की सफलतम फिल्म 'शोले' के निर्देशक रमेश सिप्पी को भला कैसे भुलाया जा सकता है।
फिल्म निर्माण के साथ-साथ अपने निर्देशन से सबको अपना मुरीद बनाने वाले बहुमुखी प्रतिभा के धनी रमेश सिप्पी 23 जनवरी को 65 वर्ष के हो जाएंगे। उनका जन्म 23 जनवरी 1944 को कराची शहर में निर्माता-निर्देशक जीपी सिप्पी के घर हुआ। इन्होंने मात्र 9 वर्ष की उम्र में बाल कलाकार के तौर पर 'शहंशाह' में अभिनय किया। अब रमेश सिप्पी के पुत्र रोहन सिप्पी भी फिल्म निर्माण के क्षेत्र में सक्रिय हैं।
बालीवुड में रमेश सिप्पी की निर्देशन क्षमता किसी से छुपी नहीं हैं। उन्होंने न सिर्फ फिल्मों में बल्कि टेलीविजन धारावाहिक 'बुनियाद' का सफल निर्देशन किया। सिप्पी ने जिन फिल्मों का निर्देशन किया उनमें प्रमुख है 'अंदाज', 'सीता और गीता', 'शान', 'शक्ति', 'सागर', 'जमीन' और 'जमाना दीवाना'।
शोले (1975) और सीता और गीता (1972) उनकी सबसे सफल फिल्मों में मानी जाती है। फिल्म शोले में चाहे जय और वीरू की जोड़ी हो, 'धन्नो की मालकिन' और कम बोलने का दावा करने वाली 'बसंती' हो, 'सूरमा भोपाली' हों या 50-50 कोस तक बच्चों के मन में डर पैदा करने वाला 'गब्बर सिंह' जैसे पात्र आज भी जीवंत हैं।
इतना अर्सा गुजर जाने के बाद आज भी लोगों के जहन में शोले का जादू बरकरार है। हो भी क्यों नहीं सुनहरा इतिहास, महीनों की एडवांस बुकिंग, सफलता के नए रिकॉर्ड और कमाई के कई नए कीर्तिमान। ये सारी बातें आज भी बड़े बैनर तले बन रही फिल्मों के लिए एक सपना है।
रमेश सिप्पी की फिल्म 'सीता और गीता' में हेमामालिनी ने दोहरी भूमिका की थी और उस दौर में यह एक सफलतम फिल्मों में एक मानी गई। इसके अलावा 'शान', 'शक्ति' और 'सागर' भी इनकी सफल फिल्म मानी जाती है।
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